Summoning Divine Energies ~ Yagya
The sacrifice of consciousness that binds you to the material world unleashes you to the unbidded cosmos.


Yajna Mahotsav
A Celebration of Devotion and Unity
Join us for a divine celebration during the auspicious occasion of Navratri at Millenium Depo. A magnificent Yagya ceremony will be conducted, featuring 500 Yajmans, dedicated to invoking blessings and prosperity for all.
- Date : 9th April to 16 April
- Tme : Morning 8AM to 1PM, Evening 3PM to 6PM
- Location : Millenium Depo
इस प्रतिष्ठात्मक अवसर पर एक महायज्ञ का भी आयोजन किया जा रहा है जिसमें कुल 501 कुंडियां स्थापित की जाएंगी। यह संख्या आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसे विभिन्न तरीकों से गणित किया जा सकता है – 1+2+3+…+25 = 325 और 1³+2³+3³+…+25³ = 176, जिनका योग 501 बनता है। इस प्रकार यह संख्या अत्यंत शुभ है।
ज्ञानार्जन
आंतरिक प्रेरणा द्वारा निर्देशित वह विलक्षण बालक ज्ञान व आत्मबोध की खोज में निकल पड़ा। वह बालक प्राचीन आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करने वाले ऋषियों को तलाशने लगा, जो जीवात्मा व परमात्मा के संबंधों का ज्ञान प्रदान करते थे। बालक ने उनसे शिक्षा ग्रहण की और विभिन्न आध्यात्मिक ग्रंथों के साथ-साथ ध्यान- ऊर्जा उपचार और मन की शक्ति से संबंधित गूढ़ ग्रंथों का भी विषद अध्ययन किया।
Yajna Mahotsav
A Celebration of Devotion & Unity
Join us for a divine celebration during the auspicious occasion of Navratri at Millenium Depo. A magnificent Yagya ceremony will be conducted, featuring 500 Yajmans, dedicated to invoking blessings and prosperity for all.
- Date : 9th April to 16 April
- Tme : Morning 8AM to 1PM, Evening 3PM to 6PM
- Location : Millenium Depo
इस प्रतिष्ठात्मक अवसर पर एक महायज्ञ का भी आयोजन किया जा रहा है जिसमें कुल 501 कुंडियां स्थापित की जाएंगी। यह संख्या आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसे विभिन्न तरीकों से गणित किया जा सकता है – 1+2+3+…+25 = 325 और 1³+2³+3³+…+25³ = 176, जिनका योग 501 बनता है। इस प्रकार यह संख्या अत्यंत शुभ है।
यह यज्ञ चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि पर आरंभ होगा और इसका उद्देश्य सनातन आध्यात्मिक परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय को दर्शाना है। ऋग्वेद में उल्लेख है:
“अग्ने यं यज्ञमध्वरं विश्वतः परिभूरसि।
स इद्देवेषु गच्छति।”
इसका अर्थ है कि हे अग्निदेव! जिस यज्ञ का आप सर्वत्र संचालन करते हो वही यज्ञ देवताओं तक पहुंचता है। यज्ञ का आयोजन भक्ति, श्रद्धा और पवित्र विधियों से किया जाएगा ताकि इसके माध्यम से सम्पूर्ण मनुष्य जाति का कल्याण हो सके।
Experience the power of collective prayers and participate in this sacred ritual to usher in positivity and harmony. To become a Yajman and be a part of this divine event, kindly fill out the form.
यज्ञार्थात् कर्मणोऽन्यत्र लोकोऽयं कर्म-बंधनः।
तदर्थं कर्मणो पि त्वा कर्म ज्याया: प्राप्स्यसि ॥ (३.१०)
One who performs his prescribed duty without attachment, better by far is he than one who leaves his duty unperformed or performs it with selfish motive. It is better to perform one’s natural duty, though imperfectly, than to undertake another’s duty perfectly.
Bhagavad Gita (Chapter 3, Verse 10)