Grand Shankhnaad Event 2024

Grand Shankhnaad Event 2024

Call of the Conch ~ Shankhnaad

Shankh (Panchajanya) is not just a musical instrument but rather a symbol of the giver of fame, longevity, and prosperity, the cleanser of sin, and the abode of goddess Lakshmi.

Conch

Shankhnaad Samaroh

1,000 Devotees Unite for World Record

This unprecedented event aims to set a world record, uniting individuals from diverse backgrounds in a harmonious celebration of spirituality and devotion. As the resonant sound of the conch shells fills the air, we come together to create a symphony of unity and reverence.

महाभारत के युद्ध के दौरान, जब पाण्डव और कौरव सेनाएं आमने-सामने आईं, तो वेदव्यास जी ने उस ऐतिहासिक क्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा:

“पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनंजय:।
पौण्ड्रं दध्मौ महाशंखं भीमकर्मा वृकोदर:।।”

अनुवाद: भगवान श्री कृष्ण ने अपना पाञ्चजन्य शंख बजाया, अर्जुन ने देवदत्त शंख और भयंकर कर्मों के लिए प्रसिद्ध भीम ने पौंड्र नामक विशाल शंख बजाया।

शंखनाद की यह प्राचीन परंपरा आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। युद्ध से पहले शंख बजाना शत्रु को आगाह करने और आत्मविश्वास जगाने का प्रतीक माना जाता था। इसी महान परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, इस वर्ष हम 11 सहस्त्र शंखनाद का आयोजन कर रहे हैं, जिससे पूरा वातावरण पवित्र गूंज से गुंजायमान हो उठेगा।

इस प्रतिष्ठात्मक अवसर पर एक महायज्ञ का भी आयोजन किया जा रहा है जिसमें कुल 501 कुंडियां स्थापित की जाएंगी।

Don’t miss your chance to be a part of this momentous occasion, where we not only break records but also strengthen the bonds of faith and community. Fill out the form to join us as we make history and usher in a new era of spiritual unity.

Shankhnaad Samaroh

1,000 Devotees Unite for World Record

This unprecedented event aims to set a world record, uniting individuals from diverse backgrounds in a harmonious celebration of spirituality and devotion. As the resonant sound of the conch shells fills the air, we come together to create a symphony of unity and reverence.

महाभारत के युद्ध के दौरान, जब पाण्डव और कौरव सेनाएं आमने-सामने आईं, तो वेदव्यास जी ने उस ऐतिहासिक क्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा:

“पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनंजय:।
पौण्ड्रं दध्मौ महाशंखं भीमकर्मा वृकोदर:।।”

अनुवाद: भगवान श्री कृष्ण ने अपना पाञ्चजन्य शंख बजाया, अर्जुन ने देवदत्त शंख और भयंकर कर्मों के लिए प्रसिद्ध भीम ने पौंड्र नामक विशाल शंख बजाया।

शंखनाद की यह प्राचीन परंपरा आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। युद्ध से पहले शंख बजाना शत्रु को आगाह करने और आत्मविश्वास जगाने का प्रतीक माना जाता था। इसी महान परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, इस वर्ष हम 11 सहस्त्र शंखनाद का आयोजन कर रहे हैं, जिससे पूरा वातावरण पवित्र गूंज से गुंजायमान हो उठेगा।

इस प्रतिष्ठात्मक अवसर पर एक महायज्ञ का भी आयोजन किया जा रहा है जिसमें कुल 501 कुंडियां स्थापित की जाएंगी।

Don’t miss your chance to be a part of this momentous occasion, where we not only break records but also strengthen the bonds of faith and community. Fill out the form to join us as we make history and usher in a new era of spiritual unity.

पांचजन्यं हृषीकेशो हेमांश्री हृषीकेशो दधत् तुम्भे च शंखान् च भेरीं च पांडवानीकः।।

Hrishikesha (Krishna) blew his conch shell Panchajanya, and Dhrishtadyumna blew his conch shell Devadatta. The Pandava army sounded its conches and drums.

Bhagavad Gita (Chapter 1, Verse 15)

Hindi